गुना, शब्दघोष।
नगर पालिका गुना के नेता प्रतिपक्ष। नाम शेखर वशिष्ठ। जाति से ब्राह्मण। वार्ड नंबर 27 के पार्षद। लेकिन नालों की सफाई करते वार्ड नंबर 30 में पाए गए तो लोग भौंचक्के रह गए। जिसने भी देखा, वह लगभग 6 फुट की की कद काठी वाले हट्टे-कट्टे और उच्च शिक्षित पार्षद को देखकर खड़ा का खड़ा रह गया। हर कोई आश्चर्यचकित था और एक दूसरे से यही सवाल कर रहा था कि पंडित जी को यह क्या सूझी, जो नालों की सफाई करते फिर रहे हैं ?
क्षेत्र के काफी लोग मौजूद थे। सब के सब थोड़े आक्रोशित और थोड़े शर्मिंदा से दिखाई दिए। पूछने पर सुरेश लोधा नाम के व्यक्ति ने बताया कि यह शेखर वशिष्ट हैं, जो कि हमारे वार्ड क्रमांक 27 के पार्षद हैं। इनसे कई महीनों से शिकायत कर रहे हैं कि वार्ड क्रमांक 30 में स्थित इस नाले के जाम होने से हमारे वार्ड क्रमांक 27 में अनेक मकानों में सीलन बैठ रही है। मच्छर भिनभिना रहे हैं, बदबू के मारे जीना मुहाल है, बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। लोग छोटे-मोटे संक्रामक रोगों का शिकार भी हो रहे हैं। लेकिन शेखर जी हर बार यही कह देते हैं कि "मैं लगातार नगर पालिका के सीएमओ और अध्यक्ष से निवेदन कर रहा हूं, अनेक लिखित शिकायतें दी हैं लेकिन उनके द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा"
इस पर हम वार्ड वासियों ने कहा कि हमने तो वोट आपको दिया है, तो फिर हमें सीएमओ या अध्यक्ष से क्या मतलब? हमारे इलाके में सफाई होगी या नहीं, आप इतना साफ-साफ बता दो। इस पर शेखर वशिष्ट जी ने फावड़े और तगाड़ियां मंगाईं तथा सफाई करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ खुद नाले में सफाई करने के लिए उतर पड़े। बड़ा आश्चर्य हुआ यह सुनकर कि आजकल के बेहद मतलबी युग में शेखर वशिष्ट जैसे जवाबदेह नेता भी पाए जाते हैं! मन नहीं माना तो उनसे चंद सवालों के जवाब देने का आग्रह किया। थोड़ी देर में हाथ वगैरा साफ करके शेखर वशिष्ट हमसे रूबरू हो गए।
अनेक सवालों के जवाब में शेखर वशिष्ट ने बताया कि जनता पार्षद को चुनती है और पार्षद नगर पालिका में अपनी जनता की नुमाइंदगी करता है। इसी प्रकार में भी वार्ड क्रमांक 27 का पार्षद हूं और नेता प्रतिपक्ष होने के नाते नगर पालिका में मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करता हूं। यहां नगर पालिका संबंधी सभी सुविधाएं संतोषजनक रूप में मतदाताओं को मिलती रहें, यह सुनिश्चित करना मेरा दायित्व बनता है। लेकिन जब नगर पालिका असहयोग करने पर अमादा हो जाए, तो फिर हमारा दायित्व बनता है कि हम जनता की उन अपेक्षाओं पर खरे उतरें, जिन्हें ध्यान में रखकर उन्होंने हमें वोट दिया था। अब जब नगर पालिका के कर्मचारी अधिकारी और सत्ता पक्ष के जन प्रतिनिधि गण सफाई नहीं कर रहे अथवा नहीं होने दे रहे, तो फिर हमें नालों में उतरना ही पड़ेगा।
क्योंकि जनता हमें मनाने नहीं आई थी कि तुम हमारे पार्षद बन जाओ। हम जनता के पास गए थे, इस कमिटमेंट के साथ, कि तुम हमें वोट दो हम तुम्हें सुविधाए दिलाएंगे। यह और बात है कि हम नगर पालिका से मतदाताओं को उपयुक्त सेवाएं नहीं दिलवा पा रहे। क्योंकि उस पर काबिज अधिकारियों कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों का सेवा करने का मन है ही नहीं। तो फिर जनता को परेशान भी नहीं होने दे सकते। इसलिए हमने तय किया कि सफाई हो अथवा नगर पालिका संबंधी अन्य सुविधाएं, यदि जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी जनप्रतिनिधि जनहित में सहयोग नहीं करेंगे तो हम जनता की सेवा में सारी मर्यादाएं तोड़कर अपने लोकतांत्रिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बात किसी एक वार्ड विशेष की नहीं है। पूरा गुना नगर हमारा घर परिवार है। यदि कहीं से भी इस प्रकार की शिकायतें मिलेंगी और जनता जनार्दन हमें किसी लायक समझेगी तथा सेवा के लिए आवाज लगाएगी, तो उनकी आवाज पर कांग्रेस के हम सभी पार्षद एवं कार्यकर्ता विभिन्न वार्डों में सेवा को तत्पर रहेंगे।
वैसे शेखर वशिष्ट का जनहित में सक्रिय होना कोई नया शिगुफा भर नहीं है। दरअसल शेखर वशिष्ट शुरू से ही एक जुझारू एवं संघर्षशील नेता रहे हैं। लोगों ने इन्हें जल संकट के समय जनता के बीच उनका नेतृत्व करते देखा है।
जब बारिश में बाढ़ आई तो इनका स्वाभाविक चिंतित होना समस्या के निदान का कारण बनता रहा है। जनता पर मुसीबत आई, अतिवृष्टि के चलते घर आदि ध्वस्त हुए, तब भी शेखर वशिष्ट छाते की ओट लेकर आम आदमी का दुख जानने और उसका निदान ढूंढने पहुंचाते रहे हैं।
आज भी शेखर वशिष्ट की बात को सुनकर आश्वस्त हुआ जा सकता है कि यदि आने वाली राजनेताओं की पीढ़ी अपने दायित्वों के प्रति इसी प्रकार जागरूक बनी रही तो फिर देश के लोकतंत्र को और अधिक मजबूत होने से कोई नहीं रोक सकता ।
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