सिने माफिया के पहले शिकार नहीं सुशांत

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सिने माफिया के पहले शिकार नहीं सुशांत

प्रधान संपादक
मोहन लाल मोदी की कलम से
सुशांत राजपूत की अकाल मौत से सिने प्रेमी स्तब्ध हैं। लेकिन उन्हें ये जानकार आश्चर्य होगा कि सुशांत सिने माफिया के पहले शिकार नहीं हैं। अपने शुरूआती कैरियर में बड़े बड़े दिग्गजों को इसने जूझना पड़ा है। फिर भी कई सितारों का कैरियर ले डूबे हैं ये दबंग। हालांकि ये सभी बातें बहुत नईं और बहुत पुरानी हैं। इनके बारे में सभी लोग भलीभांति जानते हैं।

फिर भी आज लिखने का मन हुआ, क्यों कि आजकल एक और बुरा मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह मैसेज है बॉलीवुड के जानेमाने सिंगर और कंपोजर सोनू निगम का। उन्होंने लिखा है कि आज सुशांत सिंह राजपूत मरा है, एक एक्टर मरा है, कल आप किसी सिंगर के बारे में ऐसा सुन सकते हैं या किसी कंपोजर या संगीतकार के बारे में सुन सकते हैं। सोनू निगम द्वारा लिखी गईं ये पंक्तियां मन को कचोटती हैं।

एक भय पैदा करती हैं सिने प्रेमियों के मन में। सभी जानना चाहते हैं कि ऐसा क्या हो रहा है हमारी फिल्मी दुनिया में कि कुछ लोग मर रहे हैं अथवा मारे जा रहे हैं। अब सोनू कह रहे हैं कि कल आप किसी सिंगर के बारे में ऐसा सुन सकते हैं या किसी कंपोजर या संगीतकार के बारे में सुन सकते हैं। सोनू निगम के इस संदेश को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

क्यों कि कोई नहीं चाहेगा कि फिर से कोई कलाकार अनिष्ट का शिकार हो और हम केवल अफसोस करते रह जाएं कि काश कहने वाले की बात पर गौर कर लेते! इस पर कोई यदि ये कहे कि बॉलीवुड में कुछ भी गलत नहीं है तो कहने वाले को ही गलत ठहराया जाएगा। क्यों कि यदि कुछ भी गलत नहीं होता तो सुशांत सिंह की जान नहीं जाती।

सुशांत ही क्यों, बहुत सारे जूनियर सीनियर अभिनेता हैं जो किसी सिने माफिया, सुपर स्टार, किसी जुबली कुमार अथवा किसी दबंग की नारजगी का शिकार हेाते रहे हैं। ये बात और है कि बहुत सारे कलाकार इनसे लोहा लेते रहे और सफल हुए। लेकिन ऐसे लोगों की भी संख्या कम नहीं है जिनका कैरियर इसी इंडस्ट्रीज के किसी दबंग ने खत्म करा दिया।

बड़े बड़े दिग्गजों को इनसे जूझना पड़ा

शुरूआत ही मैन धर्मेंद्र से करते हैं। बात उनके फिल्मी कैरियर के शुरूआत के समय की है। आई मिलन की बेला को एक को-स्टार चाहिए था। राजेंद्र कुमार के आभा मंडल में कोई डूबना नहीं चाहता था। नतीजतन नए नवेले धर्मेंद्र को ले लिया गया। हो गया उल्टा, धर्मेंद्र तो राजेंद्र कुमार के आभा मंडल की चकाचौंध में नहीं खोए। उल्टे धर्मेंद्र शूटिंग स्थलों पर महिला प्रशंसकोंं के केंद्र बनते गए।

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बताया जाता है कि तब एक षडय़ंत्र रचा गया। फिल्म पूरी होते होते स्क्रिप्ट बदलती गई और कोस्टार धर्मेंद्र फिल्म के एंड में विलेन के रूप में स्थापित हो गए। जब प्रीमियर शो हुआ तब धर्मेंद्र को पता चला कि वे विलेन बनाए जा चुके हैं। सब जानते है कि इस बात को लेकर हीमेन ने अपने स्टाईल में नारजगी जताई ही नहीं, दिखाई भी थी। इसी का नतीजा था कि फिर कभी धर्मेंद्र और राजेंद्र कुमार किसी फिल्म में एक साथ नजर नहीं आए।

नब्बे के दशक में जब दोनों प्रौढ़ावस्था को प्राप्त हो चले थे तब एक निर्माता ने इन दोनों के साथ दोशोले बनाने का जोखिम मोल लिया था। वो फिल्म वाकई में निर्माता के लिए जोखिम पूर्ण ही साबित हुई। इन्हीं हालातों से अपने जमाने के सुपर कॉमेडियन महमूद को गुजरना पड़ा। अपने समकालीन सुपर स्टारों से भी ज्यादा मेहनताना लेने वाले महमूद ही वो शख्श हैं, जिन्होंने अमिताभ बच्चन को बुरे समय में अपने यहां रखा।

फिल्में दिलाईं, लेकिन नहीं चले तो खुद की फिल्म बॉम्बे टू गोवा में बतौर नायक लिया। ये फिल्म हिट रही और अमिताभ को तरक्की का रास्ता मिल गया। लेकिन जिंदगी के अंतिम दिनों में महमूद फिल्म इंडस्ट्रीज द्वारा भुला दिए गए। बेहद तंग हालात थे, लेकिन उन्हें अमिताभ से उम्मीद थी और यह भरोसा भी, कि दुनिया रूठ जाए अमिताभ पीठ नहीं दिखाएगा।

लेकिन सबसे ज्यादा निराशा उन्हेंं अमिताभ बच्चन से ही मिली। तब महमूद साहब ने अमिताभ के बारे में मीडिया के सामने कहा था कि आई होप, वह दूसरों के साथ ऐसा न करें। इस बेहद छोटे सी टिप्पणी में समझा जा सकता है कि महमूद साहब अंदर से कितने भरे हुए थे।

कई सितारों का कैरियर ले डूबे दबंग

थोड़ा और आगे बढ़ें तो विवेक ओबेरॉय की बात भी आएगी। वह ऐश्वर्या रॉय से प्रेम मुहब्बत के चक्कर में इन्डस्ट्री की दबंग फैमिली से पंगा मोल ले बैठे। नतीजा सबके सामने है, विवेक की राह में इतने कांटे बिछाए गए कि उनसे लगातार फिल्में छीनी जाती रहीं। नतीजतन विवेक दुबारा से पुरानी वाली स्पीड नहीं पकड़ पाया। ये विवेक की जिंदादिली है कि उसने सुशांत की तरह बात मन में नहीं रखी।

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अपने खिलाफ किए जाने वाले षडय़ंत्रों को सबके सामने रखकर भंड़ास निकाल दी। शायद यही वजह है कि विवेक आज हम सब के बीच बने हुए हैं। गोविंदा का बॉलीवुड पर एक समय राज रहा है। लेकिन पूरे एक दशक तक उनके खिलाफ भी साजिशें की जाती रहीं। नतीजा ये हुआ कि फिल्में मिलना बंद हो गईं। जो मिलीं, वो रिलीज नहीं होने दी गईं, खुद निर्माता बने तो प्रदर्शन के लिए थिएटर तक नहीं मिलने दिए गए।

इसके लिए बकायदा डिस्ट्रीब्यूटरों पर दवाब डाला गया। नतीजा ये हुआ कि गोविंदा जैसा हंसमुख और जिंदादिल कलाकार भी लम्बे समय से घर बैठा हुआ है। गलती केवल इतनी सी थी कि पार्टनर में इन्हें औरों की अपेक्षा थोड़ी ज्यादा अच्छी रेटिंग मिल गई। बस फिर क्या था विवेक ओबेरॉय की राह में कांटे बिछाने वाली दबंग फैमिली इनके पीछे भी हाथ धोकर पड़ गई और अभी तक पड़ी हुई है।

सुशांत की मौत के लिए भी फिल्म इंडस्ट्री पर काबिज दबंग माफियाओं की हरकतें ही जिम्मेदार ठहराई जा रही हैं। बताया जाता है कभी कमसिन लडक़ों के आदी बताए गए एक सिने अभिनेता के पुत्र से सुशांत का झगड़ा हो गया था। तब सुशांत को भी कैरियर चौपट कर दिए जाने की खुली धमकी दी गई थी।

बताया जाता है कि उस नवोदित सितारे ने और उसके रसिक मिजाज पिता ने फिल्मी दुनिया के दबंगों को सुशांत के खिलाफ भी भडक़ाया और उसके हाथ से एक के बाद एक फिल्में फिसलती चली गईं। बताया जाता है कि सुशांत की मौत का एक कारण वह झगड़ा भी रहा जो सुशांत की तबाही का कारण बन गया। अब सोनू निगम ने संभावित अनिष्ट की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

यदि वो कह रहे हैं कि आज सुशांत सिंह राजपूत मरा है, एक एक्टर मरा है, कल आप किसी सिंगर या किसी कंपोजर अथवा किसी संगीतकार के बारे में ऐसा सुन सकते हैं, तो पुलिस प्रशासन ही नहीं, सरकार को भी उनकी बात पर गंभीरता से गौर करने की आवश्यकता है।

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