यूफ्रेसिया भवन से 10 लड़कियों की रिहाई

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यूफ्रेसिया भवन से 10 लड़कियों की रिहाई

सभी बच्चियों को घर भेजने के दिए निर्देश

बोर्डिंग के नाम पर बंद थीं, पुलिस प्रशासन ने निकाला

बीना तहसील अंतर्गत पीपरखेड़ी गांव के पास स्थित यूफ्रेसिया भवन से 10 लड़कियों की रिहाई कराई गई है। बताया जा रहा है कि ये सभी लड़कियां वहां पर बोर्डिंग के नाम पर बंद थीं। इन सभी को पुलिस प्रशासन ने निकाला और इनके अभिभावकों को बुलाया है। बता दें कि अनेक स्थानीय निवासियों और संगठनों द्वारा इस बावत लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं। शिकायतों के अनुसार इन लड़कियों को कोरोना काल में भी समूह बनाकर एक भवन में रखना संदेहास्पद है।

बीना। यहां के ग्राम पीपरखेड़ी के पास स्थित यूफ्रेसिया भवन में दस बच्चियों के रुके होने की सूचना बुधवार को विभिन्न संगठनों के जरिए पुलिस प्रशासनस को मिली थी। इसी दौरान लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होकर उक्त भवन पर पहुंचे। वहीं से कुछ लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। मौके पर तहसीलदार, एसडीओपी, थाना प्रभारी पहुंचे और बच्चियों से बात की। मिली जानकारी के अनुसार भवन में 5 से 12 वर्ष की दस बच्चियां पायी गईं। ये सभी गुना, अशोकनगर और धौर्रा निवासी बताई जाती हैं।

सूचना मिलने पर तहसीलदार संजय जैन ने पहुंचकर प्रबंधन से बात की। पूछे जाने पर प्रबंधन का कहना था कि वह बच्चियों को शिक्षा देने के लिए यहां रखे हुए हैं। प्रबंधन द्वारा ये दावा भी किया गया कि इसके लिए लड़कियों के मां-बाप से भी अनुमति ली गई है। उस ओर से वोर्डिंग स्कूल संचालित करने की भी बात कही गई। लेकिन जब अनुमति के दस्तावेज मांगे गए तो प्रबंधन प्रस्तुत नहीं कर पाया। इसके बाद तहसीलदार ने बच्चों से बात की। सभी बच्चियों को उनके घर भेजने के निर्देश भी यूफ्रेसिया प्रबंधन को दिए गए।

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अधिकारी मामले की जांच करने में जुटे हुए हैं और पता लगा रहे हैं कि ये लड़कियां यहां पर किस नीयत से रखी गई थीं। पीपरखेड़ी के पास स्थित यूफ्रेसिया भवन निर्मल ज्योति स्कूल की संस्था बताई जा रही है। इस दौरान अनेक राष्ट्रवादी संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस भवन की गतिविधियां संदिग्ध मानी जा रही हैं। क्योंकि कोरोना काल के चलते सभी स्कूल पूरी तरह बंद हैं। फिर क्या कारण रहा कि दस बच्चियों को यहां इक_ा रखा गया है। इसकी जानकारी न तो प्रशासन को है और न ही शिक्षा विभाग के पास ही है।

इनके संक्रमित होने का खतरा भी बना हुआ है। एक संगठन के कार्यकर्ताओं ने जब एक बच्ची की बात उसकी मां से कराई तो बच्ची रोने लगी। उसका कहना था कि हमें यहां से ले चलो । यह लोग सिर्फ चावल खाने को दे रहे हैं, अच्छा खाना भी नहीं मिल रहा है। एक बच्ची ने बताया कि यह लोग मां-बाप से बात नहीं करने देते हैं। जब खाना खाने से इंकार किया था तब बात करने दी थी। यह बात बच्चियों ने पुलिस के एसडीओ डीबीएस चौहान के सामने भी बोली। प्रशासन की सूचना के बाद शाम को दो बच्चियों के परिजन भी यूफ्रेसिया भवन आ गए थे।

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अधिकारियों ने उनके भी बयान लिए। भवन में मौजूद सिस्टर दर्शना ने बताया कि वह समाजसेवा का कार्य कर रही हैं। गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं और शिक्षित कर उन्हें घर भेज दिया जाता है। जो भी बच्चे यहां आते हैं उन्हें मां-बाप की अनुमति से ही रखा जाता है। लेकिन इनकी गतिविधियों को इस लिए भी संदिग्ध माना जा रहा है, क्यों कि वोर्डिंग स्कूल के नाम पर दस बच्चियों को पुलिस, प्रशासन और शिक्षा विभाग को सूचना दिए बगैर रखा हुआ है। जबकि अभी कोरोना काल चल रहा है। वोर्डिंग स्कूल की अनुमति भी नहीं मिली है। स्थानीय वाशिंदों को शक है कि मामले से सेवा की आड़ में गरीब लोगों का धर्म परिवर्तन कराए जाने की गंध आ रही है।

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